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डाक टिकट संग्रह दिवस

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डाक टिकट संग्रह दिवस 13 अक्टूबर को तो 15 अक्टूबर को राष्ट्रीय डाक सप्ताह मनाया जाता है

भारतीय डाक विभाग के पोस्टल फोरम के मैम्बर वरिष्ठ फिलेटलीस्ट ज्योति प्रकाश गुप्ता ने दीभारतीय डाक विभाग के पोस्टल फोरम के मैम्बर वरिष्ठ फिलेटलीस्ट ज्योति प्रकाश गुप्ता ने बताया कि 9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस से लेकर 15 अक्टूबर तक ‘राष्ट्रीय डाक सप्ताह’ मनाया जाता है, जिसके अंतर्गत 13 अक्तूबर को ‘फिलेटली दिवस’ यानी डाक-टिकट संग्रह दिवस विशेष तौर पर मनाया जाता है।

मैम्बर वरिष्ठ फिलेटलीस्ट ज्योति प्रकाश गुप्ता ने बताया कि कहा कि डाक-टिकट संग्रह के शौक को ‘हॉबी ऑफ  दा किंग्ज एन्ड किंग ऑफ दा हॉबी’ इसलिए कहा गया है .

कि इस डाक-टिकट संग्रह की शुरूआत में सर्वप्रथम ब्रिटेन के सम्राट जार्ज पंचम तथा अविभाजित भारत में बहावलपुर (वर्तमान पाकिस्तान) के नवाब जैसी सख्शियतों ने भाग लिया था, तभी इस शौक (हॉबी) को वरीयता से ऊपर माना गया, क्योंकि इस शौक में आयु सीमा का कोई बंधन नहीं है तथा घर-बैठे इस को अपनाया जा सकता है।

भारतीय डाक विभाग के पोस्टल फोरम के मैम्बर वरिष्ठ फिलेटलीस्ट ज्योति प्रकाश गुप्ता ने बताया कि डाक-टिकट संग्रह से पूरे विश्व की जानकारी मिलती है.

प्रत्येक डाक-टिकट संग्रह से पूरे विश्व की जानकारी मिलती है, प्रत्येक डाक-टिकट किसी ना किसी विषय को दर्शाती है जैसे:- महान हस्तियों के बारे में, राजनीतिक, सामाजिक, वैज्ञानिक, साहित्यक, लेखक, कवि, कलाकार, ऐतिहासिक स्मारक, कला एवं संस्कृति, वनस्पति एवं जीव-जंतु (फ्लोरा एण्ड फॉऊना), वन उपवन, अभ्यारण, औद्योगिक विकास व प्रगति, धार्मिक स्थान, दर्शनीय पर्यटन स्थल, इत्यादि अनेकों विषयों पर जानकारी घर बैठे मिलती है।

भारतीय डाक विभाग के पोस्टल फोरम के मैम्बर वरिष्ठ फिलेटलीस्ट ज्योति प्रकाश गुप्ता ने बताया कि  कुछ डाक-टिकटें विशेष अवसर या महोत्सव पर ही छापी जाती हैं .

जिस के साथ उसी दिन के ‘प्रथम दिवस आवरण’ लिफाफा तथा डाक-टिकट के बारे में विवरण सूचना पत्र (ब्रोशर) भी जारी किया जाता है, इस प्रकार की डाक-टिकटों का पुनरामुद्रण नहीं होता। कई डाक-टिकटें दुर्लभ से दुर्लभत्म भी होती है .

जैसे: ब्रिटेन में छपी महारानी विकटोरिया के चित्र वाली एक पैंस मूल्य की ब्लैक पैनी के नाम से प्रसिद्ध को कई करोड़ रूपयों की आंकी गई है। यह ब्रिटेन की सर्वप्रथम छपी डाक-टिकट है, जो कि लंदन के अजायबघर में प्रदर्शित है। ब्रिटेन कभी भी अपनी डाक-टिकटों पर अपने देश का नाम अंकित नहीं करता यह परम्परा है।

वरिष्ठ फिलेटलीस्ट ज्योति प्रकाश गुप्ता ने बताया कि उनके डाक-टिकट संग्रह में एशिया, यूरोप, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, ओसनीया महाद्वीप के लगभग 126 देशों की 3256 टिकटें है, जो उन्होंने वर्ष 1954 से लेकर अब तक संजोया है। गुप्ता ने बताया कि उनके कई रिश्तेदार विदेशों में पूर्व रंगून (बर्मा) म्यांमार में थे, फिर नेपाल, हांगकांग, अमेरिका, कनाडा, इन्डोनेशिया इत्यादि के अलावा कुछ पुराने विदेशी मित्र जापान, फ्रांस, थाईलैंड, हांगकांग चीन, इत्यादि से भी पत्र-व्यवहार के माध्यम से विदेशों की डाक-टिकटें उपलब्ध हुई हैं।

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